जितना तेरा दिमाग हे उतना तो मेरा दिमाग खराब रेहता हे !!”

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Osho

अगर आप सही में सच देखना चाहते हैं तो आप ना सहमती और ना असहमति में राय रखिये।

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​”ठोकरें खाता हूँ पर

शान” से चलता हूँ”

“मैं खुले आसमान के नीचे,

सीना तान के चलता हूँ”

“मुश्किलें तो सच है जिंदगी का,

आने दो- आने दो”।

“उठूंगा, गिरूंगा फिर उठूंगा और,

आखिर में “जीतूंगा मैं” यह ठान के चलता हूँ”